मौकों

मौकों मैं शिरकत ना होती, नज़रों मैं नज़ारे ना होते |
जो हम ना होते इस दुनिया में, इन हुस्न वालों के गुज़रे ना होते ||
— शिशिर शर्मा ‘क्रिस’ ((Shishir Sharma ‘criss’))

मैं चाहता था की मैं हिंदी मैं बहुत कुछ लिखूं, पर मैं हाल फिलहाल तो कुछ नहीं लिख पा रहा | पर हो सकता है मैं कुछ समय निकाल कर हिंदी मैं और भी कुछ लिखूं | तब तक के लिए अलविदा |

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